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सूर्य देव – औषधीय युक्त स्नान जल
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वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य जब किसी राशि में प्रवेश करते हैं, तब उसे संक्रांति कहा जाता है। प्रत्येक संक्रांति का धार्मिक, आध्यात्मिक एवं ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत विशेष महत्व होता है।
सूर्य की राशि परिवर्तन के समय दान, स्नान, जप, तप, यज्ञ, हवन तथा पितृ तर्पण जैसे धार्मिक कार्य अत्यंत शुभ फल प्रदान करते हैं।
सूर्य सम्पूर्ण राशिचक्र में लगभग एक वर्ष में भ्रमण करते हैं तथा प्रत्येक राशि में लगभग एक माह तक स्थित रहते हैं। इसी आधार पर सौर वर्ष एवं सौर मास की गणना की जाती है।
सूर्य कभी भी वक्री नहीं होते। वे सदैव सीधी गति से भ्रमण करते हैं तथा समस्त ग्रहों के राजा माने जाते हैं।
सूर्य अज्ञान रूपी अंधकार का नाश कर ज्ञान, प्रकाश, सत्य एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। उनकी दिव्य किरणें मनुष्य के भीतर आत्मबल, साहस, उत्साह तथा नई ऊर्जा का संचार करती हैं।
सूर्य के प्रमुख नाम
आदित्य
रवि
भास्कर
दिनकर
दिवाकर
मित्र
पूषा
सविता
अर्क
मार्तण्ड
प्रभाकर
भानु
तपन
विवस्वान
अरुण
सूर्य का स्वभाव
सूर्य एक अग्नि तत्व प्रधान, तेजस्वी, उष्ण, शुष्क, सात्त्विक तथा पौरुष प्रधान ग्रह हैं।
दिशा – पूर्व
धातु – स्वर्ण एवं ताम्र
तत्व – अग्नि
स्वभाव – स्थिर, तेजस्वी एवं राजसिक
गुण – सात्त्विक
वर्ण – क्षत्रिय
वैदिक ज्योतिष में सूर्य का महत्व
जन्मकुंडली में सूर्य निम्नलिखित विषयों के कारक माने जाते हैं—
आत्मा
पिता
आत्मविश्वास
सरकारी सेवा
प्रशासन
नेतृत्व क्षमता
मान-सम्मान
प्रतिष्ठा
प्रसिद्धि
राजयोग
सरकारी पद
उच्च अधिकारी
शासन शक्ति
राजनीति
नेतृत्व एवं अधिकार
स्त्री की कुंडली में सूर्य पति के सामाजिक सम्मान एवं प्रतिष्ठा का भी सूचक माना जाता है।
सूर्य सिंह राशि के स्वामी हैं।
उच्च राशि – मेष
नीच राशि – तुला
मूल त्रिकोण – सिंह
शारीरिक रूपरेखा
यदि जन्मकुंडली में सूर्य बलवान हो तो जातक—
तेजस्वी व्यक्तित्व वाला होता है।
मुखमण्डल गोल एवं आकर्षक होता है।
नेत्र चमकदार एवं प्रभावशाली होते हैं।
शरीर में अद्भुत तेज होता है।
नेतृत्व क्षमता स्वाभाविक होती है।
व्यक्तित्व प्रभावशाली एवं राजसी होता है।
कालपुरुष कुंडली में सूर्य हृदय का प्रतिनिधित्व करते हैं।
पुरुष की दाहिनी तथा स्त्री की बायीं आँख पर सूर्य का विशेष प्रभाव माना जाता है।
सूर्य से होने वाले रोग
यदि सूर्य अशुभ, नीच अथवा पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो निम्न रोग उत्पन्न हो सकते हैं—
हृदय रोग
नेत्र रोग
उच्च रक्तचाप
निम्न रक्तचाप
तेज ज्वर
पित्त विकार
माइग्रेन
टाइफाइड
मिर्गी
त्वचा रोग
मुहाँसे
थकान
रक्त विकार
शुभ सूर्य के लक्षण
यदि सूर्य शुभ एवं बलवान हो तो जातक—
आत्मविश्वासी होता है।
सम्मान प्राप्त करता है।
प्रशासनिक पद प्राप्त करता है।
समाज में प्रतिष्ठित होता है।
सत्यवादी होता है।
नेतृत्व क्षमता रखता है।
साहसी एवं निर्भीक होता है।
कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य रखता है।
जीवन में निरंतर उन्नति करता है।
बली सूर्य के प्रभाव
बलवान सूर्य जातक को प्रदान करते हैं—
आत्मबल
आत्मविश्वास
नेतृत्व क्षमता
प्रशासनिक योग्यता
यश एवं कीर्ति
मान-सम्मान
राजयोग
सफलता
साहस
पराक्रम
तेज
ओज
ऊर्जा
निर्णय क्षमता
सकारात्मक सोच
आध्यात्मिक उन्नति
समाज में प्रतिष्ठा
जीवन में स्थिरता
पीड़ित सूर्य के प्रभाव
यदि सूर्य अशुभ हों तो जातक में निम्न दोष उत्पन्न हो सकते हैं—
अहंकार
क्रोध
आत्मकेंद्रित स्वभाव
अस्थिरता
निराशा
आत्मविश्वास की कमी
पिता से मतभेद
सरकारी कार्यों में बाधा
मानहानि
प्रतिष्ठा में कमी
नेतृत्व क्षमता का अभाव
बार-बार असफलता
सूर्य से संबंधित कार्य एवं व्यवसाय
सूर्य निम्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं—
प्रशासनिक अधिकारी
आईएएस, आईपीएस
सरकारी अधिकारी
मंत्री
न्यायाधीश
सेना एवं पुलिस
राजनीति
चिकित्सक
वैज्ञानिक
उद्योगपति
राजनयिक
राजकीय सेवाएँ
सरकारी विभाग
सार्वजनिक प्रशासन
सूर्य से संबंधित वस्तुएँ
अन्न
गेहूँ
चावल
बादाम
गुड़
लाल मसूर
धातुएँ
सोना
तांबा
रंग
केसरिया
नारंगी
स्वर्णिम
लाल
वृक्ष एवं वनस्पतियाँ
बेल
आक
दूर्वा
नारंगी
औषधीय वनस्पतियाँ
पशु-पक्षी
सिंह
घोड़ा
हंस
गाय
स्थान
पर्वत
वन
दुर्ग
राजमहल
सरकारी भवन
मंदिर
सूर्य से संबंधित रत्न
रत्न – माणिक्य (Ruby)
रुद्राक्ष – एकमुखी रुद्राक्ष
यंत्र – सूर्य यंत्र
सूर्य के मंत्र
वैदिक मंत्र
ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च।
हिरण्ययेन सविता रथेन देवो याति भुवनानि पश्यन्॥
तांत्रिक मंत्र
ॐ घृणिः सूर्याय नमः॥
बीज मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥
निष्कर्ष
सूर्य केवल एक ग्रह नहीं, अपितु समस्त सृष्टि के जीवनदाता, ऊर्जा के स्रोत एवं आत्मबल के प्रतीक हैं। वैदिक ज्योतिष में सूर्य आत्मा, पिता, यश, प्रतिष्ठा, शासन, तेज, नेतृत्व एवं जीवन शक्ति के प्रमुख कारक माने गए हैं।
यदि जन्मकुंडली में सूर्य शुभ एवं बलवान हों, तो जातक को जीवन में यश, सम्मान, आत्मविश्वास, राजकीय सफलता, नेतृत्व क्षमता तथा उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होता है। वहीं अशुभ अथवा पीड़ित सूर्य आत्मविश्वास की कमी, सरकारी बाधाएँ, नेत्र एवं हृदय संबंधी रोग तथा प्रतिष्ठा में कमी का कारण बन सकते हैं।