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राहु देव – औषधीय युक्त स्नान जल
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वैदिक ज्योतिष में राहु को छाया ग्रह, माया, भ्रम, भौतिक इच्छाओं, विदेश, असाधारण उपलब्धियों, राजनीति, कूटनीति, अनुसंधान, रहस्य, आधुनिक विज्ञान, तकनीक, जनसमूह, अचानक लाभ तथा अप्रत्याशित घटनाओं का कारक माना गया है। यद्यपि राहु का कोई स्थूल भौतिक अस्तित्व नहीं है, फिर भी ज्योतिषीय दृष्टि से इसका प्रभाव अत्यंत गहन एवं व्यापक माना गया है।
राहु किसी राशि का स्वामी नहीं माना जाता, तथापि अनेक ज्योतिषीय मतों के अनुसार यह मिथुन अथवा वृषभ राशि में उच्च तथा धनु अथवा वृश्चिक राशि में नीच माना जाता है। विभिन्न परम्पराओं में इसके उच्च एवं नीच राशियों को लेकर मतभेद पाए जाते हैं।
आर्द्रा, स्वाति तथा शतभिषा नक्षत्रों के अधिपति राहु हैं। यह सदैव वक्री गति से भ्रमण करता है तथा लगभग 18 माह तक एक राशि में स्थित रहता है।
राहु मनुष्य की इच्छाशक्ति, महत्वाकांक्षा, विदेश यात्रा, आधुनिक तकनीक, डिजिटल संसार, राजनीति, मीडिया, रहस्य विद्या तथा असामान्य क्षेत्रों में सफलता का भी प्रतिनिधित्व करता है। यदि शुभ स्थिति में हो तो राहु व्यक्ति को सामान्य से असाधारण ऊँचाइयों तक पहुँचा सकता है।
राहु काल का महत्व
हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक दिन लगभग डेढ़ घंटे की एक विशेष समयावधि होती है जिसे राहुकाल कहा जाता है।
शास्त्रीय मान्यता के अनुसार इस समय में—
विवाह
गृह प्रवेश
नवीन व्यापार
यात्रा का शुभारम्भ
महत्वपूर्ण शुभ कार्य
आरम्भ करना सामान्यतः वर्जित माना गया है।
हालाँकि नियमित पूजा, जप, ध्यान, साधना एवं ईश्वर-आराधना किसी भी समय की जा सकती है।
मनुष्य जीवन पर राहु ग्रह का प्रभाव
राहु मनुष्य के मन में महत्वाकांक्षा, नवीन विचार, जोखिम उठाने की क्षमता तथा असाधारण उपलब्धियाँ प्राप्त करने की तीव्र इच्छा उत्पन्न करता है।
यदि राहु शुभ हो तो व्यक्ति—
अत्यंत बुद्धिमान होता है।
रणनीति बनाने में कुशल होता है।
राजनीति एवं प्रशासन में सफलता प्राप्त करता है।
विदेश से लाभ प्राप्त करता है।
आधुनिक तकनीक में प्रगति करता है।
समाज में प्रभावशाली व्यक्तित्व बनता है।
कठिन परिस्थितियों में अवसर खोज लेता है।
इसके विपरीत यदि राहु अशुभ अथवा पीड़ित हो तो व्यक्ति भ्रम, लालच, छल, कपट, व्यसन तथा मानसिक अशांति का शिकार हो सकता है।
शारीरिक बनावट एवं स्वभाव
यदि जन्मकुंडली के लग्न भाव में राहु स्थित हो तो जातक—
आकर्षक एवं प्रभावशाली व्यक्तित्व वाला होता है।
भीड़ में अलग पहचान बनाता है।
साहसी एवं जोखिम उठाने वाला होता है।
नई चीज़ों को अपनाने में अग्रणी रहता है।
रहस्यमयी एवं प्रभावशाली व्यक्तित्व रखता है।
राजनीति, व्यवसाय अथवा जनसंपर्क में सफलता प्राप्त कर सकता है।
यदि राहु अशुभ हो तो—
स्वभाव में अस्थिरता
अत्यधिक महत्वाकांक्षा
छल-कपट
असत्य भाषण
भ्रमित निर्णय
जैसी प्रवृत्तियाँ विकसित हो सकती हैं।
बली राहु के प्रभाव
यदि जन्मकुंडली में राहु शुभ एवं बलवान हो तो जातक को निम्नलिखित शुभ फल प्राप्त होते हैं—
तीव्र बुद्धि
रणनीतिक सोच
असाधारण सफलता
राजनीति में उन्नति
विदेश से लाभ
आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में सफलता
अनुसंधान में उपलब्धि
समाज में प्रभाव
जनसमूह पर नियंत्रण
प्रशासनिक क्षमता
अचानक धन लाभ
प्रसिद्धि एवं लोकप्रियता
कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने की क्षमता
बलवान राहु साधारण व्यक्ति को भी असाधारण सफलता प्रदान कर सकता है।
पीड़ित राहु के प्रभाव
यदि राहु अशुभ अथवा पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो जातक को निम्न समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है—
मानसिक भ्रम
निर्णय क्षमता में कमी
नशे की प्रवृत्ति
झूठ बोलने की आदत
छल एवं कपट
धोखाधड़ी
अनैतिक कार्यों की ओर झुकाव
न्यायालय संबंधी समस्याएँ
पारिवारिक कलह
व्यर्थ यात्राएँ
अपयश
सामाजिक बदनामी
अस्थिर जीवन
राहु ग्रह से होने वाले रोग
यदि राहु अशुभ अथवा पीड़ित हो तो निम्न रोग उत्पन्न हो सकते हैं—
त्वचा रोग
एलर्जी
विष संबंधी विकार
गैस्ट्रिक समस्या
आँतों के रोग
अल्सर
मानसिक विकार
भय एवं भ्रम
नशे की लत
विषाक्तता
अनिद्रा
तंत्रिका संबंधी विकार
राहु ग्रह से संबंधित कार्य एवं व्यवसाय
राहु आधुनिक एवं असामान्य क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करता है—
राजनीति
कूटनीति
सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी)
साइबर सुरक्षा
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
डिजिटल मीडिया
फिल्म एवं मनोरंजन उद्योग
विदेशी व्यापार
आयात-निर्यात
विमानन
अनुसंधान
जासूसी सेवाएँ
खुफिया विभाग
फॉरेंसिक विज्ञान
रसायन उद्योग
औषधि अनुसंधान
राहु ग्रह से संबंधित वस्तुएँ
राहु ग्रह के अधिकार क्षेत्र में आने वाली प्रमुख वस्तुएँ—
इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
रसायन
गैस
धुआँ
पेट्रोलियम उत्पाद
प्लास्टिक
कृत्रिम पदार्थ
नीले एवं धूम्रवर्ण वस्त्र
विदेशी वस्तुएँ
आधुनिक तकनीकी उपकरण
टिप्पणी: कुछ प्राचीन ग्रंथों में मांस, मदिरा एवं नशीले पदार्थों का उल्लेख राहु के तामसिक प्रभाव के संदर्भ में मिलता है। इन्हें राहु की प्रवृत्ति का प्रतीक माना जाता है, न कि इनके सेवन की अनुशंसा।
राहु ग्रह से संबंधित स्थान
हवाई अड्डे
अनुसंधान प्रयोगशालाएँ
विदेशी संस्थान
आईटी पार्क
डिजिटल नेटवर्क
रासायनिक कारखाने
भूमिगत स्थान
सीमा क्षेत्र
गुप्त स्थान
पुरातात्त्विक स्थल
राहु ग्रह से संबंधित पशु-पक्षी
साँप
बिच्छू
गिरगिट
छिपकली
मगरमच्छ
काला कुत्ता
कौआ
विषैले जीव
राहु ग्रह से संबंधित वनस्पति
जड़ – नागरमोथा (मुस्ता) की जड़
राहु ग्रह से संबंधित रत्न एवं पूजन सामग्री
रत्न – गोमेद (Hessonite Garnet)
रुद्राक्ष – अष्टमुखी रुद्राक्ष
यंत्र – राहु यंत्र
रंग – धूम्रवर्ण, गहरा नीला एवं धूसर
नोट: गोमेद रत्न सदैव योग्य एवं अनुभवी ज्योतिषाचार्य की सलाह से ही धारण करना चाहिए।
राहु ग्रह के उपाय
यदि जन्मकुंडली में राहु अशुभ अथवा पीड़ित हो तो निम्न उपाय लाभकारी माने गए हैं—
भगवान शिव की आराधना करें।
देवी दुर्गा एवं माँ कालरात्रि की उपासना करें।
श्रीहनुमान चालीसा का नियमित पाठ करें।
महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
काले तिल एवं नीले वस्त्र का दान करें।
निर्धनों एवं रोगियों की सेवा करें।
नशे एवं असत्य से दूर रहें।
राहु मंत्रों का नियमित जप करें।
योग्य ज्योतिषाचार्य की सलाह से गोमेद धारण करें।
राहु ग्रह के मंत्र
वैदिक मंत्र
ॐ कया नश्चित्र आ भुवदूती सदावृधः सखा।
कया शचिष्ठया वृता॥
तांत्रिक मंत्र
ॐ रां राहवे नमः॥
बीज मंत्र
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः॥
धार्मिक एवं पौराणिक महत्व
समुद्र मंथन की पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवताओं एवं असुरों के मध्य अमृत वितरण हो रहा था, तब स्वर्भानु नामक एक असुर देवताओं का वेश धारण कर अमृतपान करने बैठ गया।
सूर्यदेव एवं चंद्रदेव ने उसकी पहचान भगवान विष्णु को बताई। तत्पश्चात भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका मस्तक धड़ से अलग कर दिया।
चूँकि अमृत उसके कंठ से नीचे नहीं पहुँचा था, इसलिए उसका मस्तक राहु तथा धड़ केतु के रूप में अमर हो गया। इसी कारण राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार सूर्य एवं चंद्रमा द्वारा पहचान बताए जाने के कारण राहु समय-समय पर उन्हें ग्रसने का प्रयास करता है, जिसे सूर्य ग्रहण एवं चंद्र ग्रहण के रूप में समझाया गया है।
खगोल एवं ज्योतिषीय दृष्टि से राहु
खगोल विज्ञान में राहु कोई वास्तविक ग्रह नहीं है। यह वह बिंदु है जहाँ चंद्रमा की कक्षा, सूर्य के प्रत्यक्ष पथ (क्रांतिवृत्त) को उत्तर दिशा की ओर काटती है। इसे उत्तर चंद्र नोड (North Lunar Node) कहा जाता है।
वैदिक ज्योतिष में राहु का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि यह कर्म, इच्छाओं, भौतिक उपलब्धियों, भ्रम, विदेशी संबंधों एवं अप्रत्याशित परिवर्तनों का सूचक माना जाता है।
निष्कर्ष
वैदिक ज्योतिष में राहु केवल अशुभ ग्रह नहीं है, बल्कि यह असाधारण उपलब्धियों, आधुनिक ज्ञान, विदेश, राजनीति, अनुसंधान एवं जीवन के अप्रत्याशित अवसरों का भी कारक है। शुभ एवं बलवान राहु व्यक्ति को समाज में उच्च प्रतिष्ठा, तीव्र बुद्धि, विदेशी लाभ तथा विलक्षण सफलता प्रदान कर सकता है, जबकि अशुभ अथवा पीड़ित राहु भ्रम, व्यसन, मानसिक तनाव तथा अनैतिक प्रवृत्तियों का कारण बन सकता है।